सकती नगर के भू माफियाओ के द्वारा किए गए अवैध प्लाटिंग के विरुद्ध दर्ज होंगे प्रकरण अवैध प्लाटिंग वाले क्षेत्रों में बिजली पानी उपलब्ध नहीं कराएगी नगरपालिका


प्रमुख छत्तीसगढ़ / भगत शर्मा की रिपोर्ट:---

जांजगीर चांपा जिले के सक्तीअनुविभागअंतर्गत अनुसूचित जनजाति वर्ग की भूमि को अनुसूचित जनजाति वर्ग के व्यक्ति के नाम पर खरीद कर भूमि मंजूरी पश्चात सामान्य वर्ग के व्यक्ति को बेचने का मामला प्रकाश में आया है । ज्ञात हो कि अनुसूचित जनजाति (आदिवासी) वर्ग की भूमियों को गैर आदिवासीयों को बिक्री हेतु कलेक्टर अनुमति की आवश्यकता होती है । 
 

 इस कारण से आदिवासियों की भूमि उचे दामों पर नही बिकती है जहां एक ओर छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद से जमीनो की कीमतोमें बेतहाषा वृद्धि हुई है इसी कारण से जमीन दलालों एवं खरीदने वालों के एक वर्ग ने आदिवासियों की भूमि सड़को से लगी या व्यवसायिक उपयोग की दिखने वाली भूमि को कम दर पर किसी एक आदिवासी के नाम पर खरीद लिया जाता है तथा कुछ वर्षों पश्चात कलेक्टर से विक्रय के अनुमति प्राप्त कर सामान्य वर्ग के व्यक्ति को ऊंचे दाम पर बेचने का धंधा चल रहा है ग्राम केरीबंधा के एक आदिवासी गोड़ जो सामान्य परिवार का व्यक्ति है उसके नाम पर जमीन दलाल ने अन्य आदिवासियों से खरीद 20-25 ग्रामों में तहसील सक्ती व चांपा में करोड़ो रूपयों की उपयोगी जमीन खरीदी हुई है खरीददारों की आवश्यकता अनुरूप सौदा कर भूमि मंजूरी का खेल खेलकर सामान्य व्यक्तियों को ऊंचे दाम पर बेच रहे है इसके लिये बाकायदा दलाल कलेक्टर से लेकर अनुविभागीय अधिकारी, तहसीलदार एवं पटवारी कार्यालय तक इस बेनामी आदिवासी को ले जाते है ये सब पटवारी, तहसीलदार स्तर के निम्न अधिकारियों को भली भाति ज्ञात होता है कि इस आदिवासी के नाम पर गैर आदिवासियों ने जमीन खरीदी हुई है लेकिन वे अपना हिस्सा लेकर बिक्री किये जाने की अनुमति प्रतिवेदन तैयार कर देते है जबकि कलेक्टर द्वारा मांगे गये प्रतिवेदन में कंडिका 01 मैं स्पष्ट लिखा होता है कि बिक्रेता के पास कुल कितनी भूमि है कंडिका 08 में यदि भूमि क्रयशुदा हो तो पूर्व आदिवासी विक्रेता का कथन लिया जावें ।  साथ ही साथ कोई आदिवासी वर्ग का व्यक्ति खरीदने को तैयार है कि नही है ?  लेकिन तहसीलदार एवं पटवारी के द्वारा प्रमुख बातो को छिपाकर छोटे मोटे अखबार में ईष्तहार प्रकाशित कराकर सामान्य व्यक्ति को बेचने की अनुशंसा कर दी जाती है ।  बेनामी क्रेता आदिवासी की कुल भूमियों के संबंध में गलत जानकारी बनायी जाती है ।  पूर्व आदिवासी विक्रेता का कथन नही लिया जाता है साथ ही साथ विक्रय की जाने वाली भमि कितने वर्ष पूर्व  किससे खरीदी गई, कितने में खरीदी गई इत्यादि तथ्यो को छिपाकर अनुशंसा करा ली जाती है जिसकी भनक अनुविभागीय अधिकारी राजस्व श्री सुभाषसिंह राज को होने पर उन्होने उस आदिवासी व्यक्ति को बुलाकर 3-4 प्रश्न करने पर ही आदिवासी हड़बडा़ने लगा जिसके पश्चात से ही संबंधित भू माफिया जिसने आदिवासी के नाम पर भूमि क्रय की हुई है एसडीएम कार्यालय के चक्कर लगा रहा है ।  यदि इस आदिवासी से गहराई से पूछताछ की जावें तो ज्ञात होगा कि उसके नाम पर केवल जमीन खरीद बिक्री का धंधा किया जा रहा है जिसके लिये उसे सलाना 25-30 हजार रूपये दिये जाते है उसके पास खरीदी गई भूमियों के कोई भी बिक्रय पत्र, ऋण पुस्तिका, बैंक पासबुक या चेक इत्यादि कोई भी कागजात नही होता है सभी कागजात जमीन दलालों के पास होते है उसे यह तक भी ज्ञात नही होता है कि उसके नाम पर कितने स्थानों पर कितनी भूमिया खरीदी गई है ।  इस ओर शासन को गम्भीरता से मंजूरी प्रकरणो मे ध्यान देने की आवश्यकता है जिससे कि भोले भाले आदिवासियों की भूमियों को संरक्षित रखा जा सके तथा जिसका लाभ उन्हें ही दिलाया जा सके ।

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