मालखरौदा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के बीएमओ फिर से विवादों में



मालखरौदा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के बीएमओ फिर से विवादों में

जाँजगीर मालखरौदा समाचार  सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मालखरौदा सदा विवादों में रहने वाला स्वास्थ्य केंद्र है ।मालखरौदा  सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र  और विवादों का चोली दामन का साथ रहा है । यहां जब भी विवाद हुए हैं उसके पीछे  सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की बीएमओ  डॉक्टर कात्यानी सिंह और डा.सिदार  का हाथ रहा हैं । इस बार भी  इस विवाद के पीछे  डॉक्टर कात्यानी और डा. सिदार का अप्रत्यक्ष हाथ बताया जा रहा है ।
मिली जानकारी के अनुसार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ डॉक्टर संतोष पटेल 15 दिनो की कोविड-19 की ड्यूटी करके 4 जुलाई को मालखरौदा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र वापस लौटे ।5 तारीख को रविवार की छुट्टी पड़ी ।रविवार को राष्ट्रीय अवकाश अन्य सभी लोगों के साथ डॉक्टरों को भी मिला हुआ है अतः डा. पटेल ने भी रविवार का अवकाश अपने घर अर्थात अपने मुख्यालय मे बिताया, परंतु रविवार के सामान्य अवकाश के लिए भी डॉक्टर कात्यानी सिंह ने डॉक्टर संतोष पटेल को नोटिस दिया । जबकि डॉ संतोष पटेल का इस विषय में कहना है कि क्योंकि उन्हें किसी तरह के आपातकालीन ड्यूटी के लिए नहीं कहा गया था और ना ही मुझे इस विषय पर कोई कारण बताया गया था ,अतः मैंने रविवार को अन्य सामान्य दिनों की तरह घर मे रहकर  व्यतीत किया ।सोमवार को 6 तारीख को जब संतोष पटेल अपनी ड्यूटी पर आठ बजे सुबह आए तब वे ओपीडी मे उन्होंने ड्यूटी करनी शुरू की । उसी दिन ग्राम पंचायत  तौलीपाली से दो बच्चों को सांप काटने का केस मालखरौदा  सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया था । यह बच्चे हॉस्पिटल आने के पूर्व ही मर चुके थे और डॉक्टर देवांगन ने उन मृत बच्चो का मुलाहिजा किया और इसकी रिपोर्ट थाने मे दी । चूँकि उस समय तक आपातकालीन डयूटी डा. देवांगन की होने के कारण मृत बच्चों के पोस्टमार्टम की ड्यूटी भी डा.देवांगन की थी परंतु बीएमओ डॉ कात्यायनी सिंह ने अचानक डा. संतोष पटेल को आपातकालीन ड्यूटी का निर्देश दिया और पोस्टमार्टम करने के लिए डा. पटेल से कहा ।अचानक ही आपातकालीन ड्यूटी लगाये जाने के कारण डॉक्टर संतोष पटेल को शंका हुई क्योंकि इसके पूर्व भी डॉक्टर कात्यानी सिंह डॉक्टर पटेल को इस तरह कई झूठे मामलों में फंसाने की कोशिश की थी अतः उन्होंने इस बात को विधायक प्रतिनिधि और विधायक रामकुमार यादव को बताया । विधायक रामकुमार यादव को विश्वास में लेने पर ही उन्होंने उन मृत बच्चों का पोस्टमार्टम किया ।  डा .पटेल की आपातकालीन ड्यूटी सोमवार और गुरुवार को होती ही है परंतु अचानक ही डा देवांगन के डयूटी बदलने के पीछे क्या मंशा है यह समझ नही आ रहा था पर षडयंत्र की आशंका डा. पटेल को जरुर थी क्योंकि बीएम्ओ का आदेश था इसलिए डॉक्टर संतोष पटेल ने 6 जुलाई 2020 को आपातकालीन ड्यूटी करते हुए तौलीपाली से आये उन दो बच्चों जो मृत हो चुके थे उनका पोस्टमार्टम किया ।
कुछ दिनों के पश्चात व्हाट्सएप और फेसबुक में इस आशय की खबर वायरल हुई की तौलीपाली के उन ग्रामीणों ने डॉक्टर संतोष पटेल के खिलाफ शिकायत की है कि डॉक्टर संतोष पटेल ने उन 2 मृत बच्चों के पोस्टमार्टम के लिए ₹50000 की मांग की है ।जब इस बात का पता डॉक्टर संतोष पटेल को चला उन्होंने उन तीनों लोगों का जिनका नाम करमहा,रामलाल और श्यामलाल है उन्हें बुलवाया और उनसे पूछा तब उन्होंने बताया कि और  उन तीनो मे से किसी प्रकार की कोई शिकायत  नहीं की है और उनमे से करमहा और रामलाल  ग्रामपंचायत तौलीपाली के नही है
है । वे दोनो ग्रामपंचायत झर्रा के है ।तब उन तीनो ने  शपथ पत्र लिखकर बताया है कि उनका इस शिकायत से कोई लेना देना नही है और ना वे उन बच्चो को जानते है ना उनका किसी प्रकार का कोई संबंध है और उन लोगों ने यह भी मांग की है कि जिन लोगों ने भी हमारे नाम का इस्तेमाल डॉक्टर संतोष पटेल को फँसाने एवं षड्यंत्र करने में किया है , उन लोगों के खिलाफ कार्यवाही की जाए , साथ ही तौलीपाली के सरपंच ने भी इस मामले की शिकायत थाने मे कि है और झूठी खबर वायरल करने वालो पर कार्यवाही की माँग की है ।
अब प्रश्न उठता है कि बार-बार डॉक्टर संतोष पटेल को ही टारगेट क्यों किया जाता है ।जब से वे यहां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मालखरौदा मे हैं उनके खिलाफ लगातार षड्यंत्र रचे जाते रहे हैं डॉक्टर संतोष पटेल ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी एसआर बंजारे से मांग की है कि मेरे खिलाफ षड्यंत्र रचने वालों के ऊपर कार्यवाही कर मुझे न्याय दिलाएं ।

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