सोशल जस्टिस एंड लीगल फाउंडेशन द्वारा प्रबोध प्रकाशन के खिलाफ FIR हेतु लीगल सेल की ओर से मुंगेली जिला अजाक थाना में पत्र दिया गया




अरविन्द बंजारा मुंगेली।

मुंगेली/ सोशल जस्टिस एंड लीगल फाउंडेशन द्वारा प्रबोध प्रकाशन के खिलाफ FIR हेतु लीगल सेल की ओर से  मुंगेली जिला अजाक थाना में पत्र दिया गया जिसमे शैलेश कुर्रे,भूपेंद्र बांधी,नरेंद्र टंडन,धरमसिंह,पेवेंद्र बारमते,गोविन्द नवरंग,विजय मारखंडे,राजेश खन्ना,रूपेंद्र भारती,अरविन्द बंजारा सहित अधिकारी व कर्मचारी उपस्थित थे।  युगबोध अग्रवाल प्रबोध  एंड कंपनी प्राइवेट लिमिटेड गीता नगर जी ई रोड रायपुर छत्तीसगढ़ द्वारा प्रकाशित प्रबोध हिंदी आधार कक्षा ग्यारहवीं हिंदी गाइड के समसामयिक निबंध विधा अंतर्गत आरक्षण जो कि संवैधानिक प्रावधान है के विरूद्ध में असंवैधानिक लेख लिखा गया है । निबंध का शीर्षक  आरक्षण की समस्या पृष्ठ क्रमांक 47-48 में वर्णित है।
इस लेख में संविधान निर्माता डाक्टर भीमराव अंबेडकर को पिछड़ी जातियों और अनुसूचित जनजातियों के उत्थान के लिए सरकारी नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में आरक्षण करने की व्यवस्था करने वाला बताया गया है । अनुसूचित जाति के लिए नहीं लिखा । इससे डा.आंबेडकर के प्रति गलत धारणा बच्चों के मन में आ रही है । 


निबंध के पैरा 2 में आरक्षण क्यों ? का उल्लेख किया गया है जिसमें उन्होंने लिखा है । यह प्रणाली अपने आप में समाज विरोधी है । किसी एक वर्ग को किसी भी नाम पर सुविधा पाते देखकर शेष समाज में ईष्र्या,द्वेष और प्रति हिंसा का वातावरण फैलता है । इसलिए आरक्षण मूलतः गलत है।  इस तरह से प्रतिनिधित्व के अधिकार के विरोध में असंवैधानिक लेख किया गया है।  
पैरा 3 में भारत में आरक्षण टापिक के अंतर्गत उन्होंने लिखा है -यहां एक और सवर्ण जातियों का दबदबा है,तो दूसरी ओर हरिजन अछूत मौलिक अधिकारों से वंचित हैं।यहां कुछ जातियां शासन पर सदा कब्जा जमाए रखती हैं तो निम्न जातियों को वोट भी नहीं डालने दिया जाता यहां अनेक जनजातियां ऐसी हैं जो जंगली जीवन जी रहे हैं।इस तरह से अनुसूचित जनजातियों को जंगली जीवन जीने वाला उल्लेखित किया गया।ईस पैरा मे अनुसूचित जाति के लिए असंवैधानिक शब्द हरिजन का उपयोग किया गया है।प्रकाशक की उक्त कृत्यो से अनुसूचित जाति वर्ग अपमानित महसूस कर रहा है।

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