छत्तीसगढ़ उपसंपादक -- जितेन्द्र तिवारी
विश्व पालक श्री विष्णु का जाग्रत का पर्व देवउठनी-सुश्री पूजा किशोरी
(तुलसी विवाह-प्रबोधनी एकादशी विशेष)
जांजगीर- ब्रम्हाण्ड के जनक श्री बम्हा,पालनकर्त्ता श्री विष्णु और संहारक श्री महेश (शिवजी) हैं।आप सभी को पालनकर्त्ता श्री विष्णु के जाग्रत दिवस देवउठनी एकादशी(प्रबोधनी) तुलसी विवाह की हार्दिक शुभकामनायें !उक्त बातें क्षेत्रीय भागवत कथावाचिका सुश्री पूजा किशोरी ने तुलसी विवाह के सु पावन अवसर पर भक्तजनों को दी है। उन्होंने कहा कि कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवउठनी एकादशी (प्रबोधनी एकादशी) मनाते हैं ।इसे विश्व पालनकर्त्ता एकादशी (श्री देव उठनी एकादशी)भी कहते है !इस एकादशी का विशेष महत्व है कि इस तिथि पर भगवान विष्णु जी अपनी निद्रासन से जाग्रत होते है, वे शयनकाल को पूर्ण करते हैं और पुनः पृथ्वी की बाग़डोर अपने हाथों में ले लेते हैं !भगवान श्री विष्णुजी आषाढ शुक्ल पक्ष की एकादशी(देवशयनी) को देव शयन करते है,इस दिन से ही चातुर्मास आरम्भ होता है जो कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी के दिन भगवान श्रीविष्णु जी के उठते ही चातुर्मास समापन हो जाता है। उन्होंने कहा शांताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं,विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णंं शुभांगी....श्लोक से बताया कि मन को शांति देनेवाला भगवान विष्णु का ध्यान करने इस श्लोक का जपन करना चाहिए। उन्होंने बताया कि पौराणिक मान्यता के अनुसार देवउठनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु जी क्षीरसागर में चार माह के बाद जागते हैं, जब भगवान विष्णुजी पाताललोक में विश्राम करने के लिए आते हैं तो सभी प्रकार के मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाती हैं ! इस दौरान शादी विवाह जैसे आयोजन नहीं किये जाते हैं, एकादशी पर विष्णु के जागने के बाद सभी प्रकार के मांगलिक कार्य आरम्भ हो जाते है या किये जाते है ! देवउठनी एकादशी को तुलसी विवाह भी किया जाता हैं इस एकादशी को व्रत का भी विधान है इस दिन भगवान विष्णु जी का व्रत रखा जाता है जो बहुत ही लाभदायक और पुण्यदायी होता हैं। देवउठनी एकादशी को उखल के ऊपर गन्ने को रख कर विधि-विधान से पूजन किया जाता हैं क्योंकि गन्ना यश का प्रतीक है। द्वापर युग में ही माँ यशोदा जी ने श्री कृष्ण को उखल से बाँधा था इसलिए उखल का पूजन किया जाता है । इस वर्ष 2020 में देवउठनी 25 नवंबर 2020 को 2:42 से आरम्भ और 26 नवंबर 2020 को शाम 5:10 पर समाप्त होगी ।
आप सभी भक्तजनों को जय श्री राधे राधे
सुश्री पूजा किशोरी
क्षेत्रीय कथावाचिका

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