बदलते मौसम में बीमारियों ने पैर पसारना शुरू किया



प्रमुख छत्तीसगढ़/अक्षय लहरे मुंगेली।
 
मुंगेली - बदलते मौसम की शुरुआत होते ही मौसमी बीमारियों ने पैर पसारना शुरू कर दिया है। दिन भर की उमष भरी गर्मी ने लोगो के जीवन को हलाकान कर दिया है, जिसके चलते अब घर में सर्दी, जुखाम, बुखार आदि के मरीज बढ़ रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्र में पर्याप्त चिकित्सा सुविधा नहीं होने के कारण ग्रामीण झोलाछाप नीम हकीमों से सस्ते के चक्कर में इलाज कराने को मजबूर हो रहे हैं। जिसके चलते गांव गांव में झोलाछाप लोगों ने अपनी दुकान खोल दी है।

जहां कम पैसों में मरीज का उपचार कर उनके जीवन से खिलवाड़ करने में लगे हैं। लंबे समय से सबंधित विभाग द्वारा इनके खिलाफ कार्रवाई नहीं होने से इनकी संख्या में हर साल इजाफा हो रहा है। गौरतलब है कि हाईकोर्ट ने ग्रामीण क्षेत्रों में झोलाछाप नीम-हकीमों के इलाज पर रोक लगाने के लिए राज्य शासन को निर्देश दिए थे। इसके बाद भी क्षेत्र में खुलेआम झोलाछाप सक्रिय हैं। स्थिति यह है कि इनके पास कोई डिग्री है न कोई इलाज करने का लाइसेंस है। इसके बाद भी ये लोग आम जनता के जीवन से खेलने में लगे हुए है। कुछ दिनों पूर्व सेतगंगा क्षेत्र में एक झोलाछाप डाक्टर की करनी का खामियांजा एक महिला को भुगतना पडा था, डाक्टर द्वारा दिये गये गलत इंजेक्शन की वजह से महिला के पैरों में दिक्कत होनी शुरू होगई थी, पुलिस में हुई शिकायत के बाद भी उक्त महिला को न्याय नही मिल सका, इसके अतरिक्त सेंतगंगा और वनांचल क्षेत्रों में इन डाक्टरों का बोलबाला है जो बिना किसी विभागिय अनुमती के अपनी दुकानों का संचालन बदस्तुर जारी रखें है ।

मेडिकल की आड में होता कारोबार - अंचल में अपना पाव पसार रहे ये डाक्टर दवाई दुकानो का संचालन कर या किसी के माध्यम से दवाई दुकानों में ही अपनी रोजी रोटी सेकने में लगे है। सामने दवाई दुकान के नाम पर अपनी दुकान चलाने वाले इन रसूखदारो को न किसी विभागीय अधिकारी का भय सता रहा न ही ये लोगो की जान से खेलने में कोई परहेज करते है।

यह सब स्वास्थ विभाग की अनदेखी एवं निष्क्रियता को सामने लाता है। जब मरीज के साथ कोई घटना घटित होती है। तब शासन व प्रशासन और स्वास्थ विभाग जागता हैं। चिकित्सा और दवाओं के बारे में कोई जानकारी नहीं होने के बावजूद झोलाछाप हर मर्ज का शर्तिया इलाज करने का दावा करते नहीं थकते हैं। इनसे इलाज कराने वाले लोगों को फायदा तो नहीं होता बल्कि उनका मर्ज और बढ़ जाता है। कई बार तो जान पर बन आती है। कुछ ऐसे झोलाछाप भी हैं जो नर्सिंग होम में कुछ दिन कंपाउंडरी करने के बाद क्लीनिक चला रहे हैं। मेडिकल कांउसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) तथा सेंट्रल कांउसिल ऑफ इंडिया (सीसीआईएम) ने एलोपैथी, आयुर्वेद व यूनानी चिकित्सा पद्धति को मान्य किया है। इन पद्धति में डिग्री लिए बिना जो लोग मरीजों का इलाज कर रहे हैं। उनको फर्जी डॉक्टर कहते हैं।

Post a Comment

0 Comments