सेतगंगा मेला में गुरु दर्शन एवं श्रीराम जानकी मंदिर का दर्शन करने पंहुचे जिलाध्यक्ष दिलीप बंजारा मंदिर में मत्था टेक लिए आशिर्वाद ..

 मुंगेली / छत्तीसगढ़ राज्य के जिलामुख्यालय मुंगेली से महज16 किलोमीटरमेंस्थित सेतगंगा श्री राम जानकी मंदिर भी प्राचीन धार्मिक धरोहरों में से एक है।  मंदिर के बाह्य दीवारों पर उकेरे  गये चित्र और गर्भ गृह के सामने विशाल पत्थरों  से नक्काशी इसका  बड़ा उदाहरण है।इसे देखकर सामान्य अनुमान लगाया जा सकता है कि तत्कालीन राजा बहुत ही   धार्मिक और कला प्रेमी रहा होगा।यद्यपि मंदिर में अनेक देवी देवताओं की मूर्ति स्थापित है किंतु गर्भ गृह में विराजित श्री राम  लक्ष्मण और मां भगवती सीता की आकर्षक मूर्ति ने  श्री राम जानकी मंदिर के नाम से पहचान दिलायी।अद्वितीय  पुरातात्विक,  रमणीय,  और ऐतिहासिक श्री राम जानकी मंदिर जिनकी तीन  विशेषताए है पहला वहाँ  मां नर्मदा कुंड है दूसरा वहाँ के मंदिरों  के 
 बाह्य दीवारों पर मिथुन मुर्तिया हैं 
और  तीसरा द्वार पर दशानन रावण की पद्मासन मुद्रा पर मूर्ति है , 
गर्भगृह में प्रार्थना की मुद्रा में हनुमान जी भी विराजित है।
माघ पूर्णिमा के पावन बेला पर आस्था के केंद्र बिंदु के ऐतिहासिक स्थल में 14 फरवरी से 16,17,18,तक भव्य मेले का आयोजन किया गया है।
जिसमे बड़ी संख्या में श्रद्धालु मा नर्मदा कुंड में आस्था रूपी डुबकी लगाकर धन्य होंगे किवदंती है कि  पडरिया  के तत्कालीन राजा अमरकंटक स्थित मा नर्मदा मंदिर  के  अनंय  भक्त थे अनेक पर्वो पर वे वहाँ स्नान करने जाया करते थे। वृद्धावस्था मे जब वहाँ जाने में  असमर्थ हो गए  तब वे व्याकुल होने लगे। एक दिन अर्ध रात्रि को स्वप्ननादेश हुआ कि , हे राजन-- मैं  तुम्हारे  भक्ति से प्रसन्न हूँ। मैं तुम्हारे ही राज्य के पूर्वी तट पर प्रगट हो रही हूँ। तुम वहाँ  जाओ  और मेरे नाम कुंड व मंदिर  की स्थापना करो। स्वपनादेश पर राजा दूसरे दिन  अपने सैनिकों के साथ   अपने ही राज्य के  पूर्वी तट पर माँ नर्मदा की  उद्दगम  स्थल को ढूंढने निकल पड़े।   अपने राज्य के अंतिम छोर में माँ नर्मदा की उद्दगम  दिखाई दिया।  राजा ने उक्त स्थल में एक भव्य मंदिर व कुंड का निर्माण किया   कालांतर में वहाँ एक बस्ती बसी जिसका नाम श्वेत गंगा पड़ा। 
यहां की मंदिर 11वीऔर 12 वी शताब्दी में ग्रेनाईट पत्थर से निर्मित अत्यंत प्राचीन खंडित  भग्नावशेष मुर्तिया जिसमे शिव जी  नंदी बैल ,मुख श्री गणेश जी कर्तिकेय मुंड भैरव जलहरी आदि प्रतिमाओं की दुर्लभ अवशेष को संग्रहित कर जीर्णोध्दार किया गया है कुछ बेशकीमती मूर्तियां आज से 40 ,50 वर्ष  पूर्व अव्यवस्थित होने के कारण पुरातत्व संग्रहालय में  संग्रहित है।
जहां माघ पूर्णिमा मेला अवसर पर सेतगंगा मेला में गुरु दर्शन एवं  श्रीराम जानकी मंदिर का दर्शन करने कांग्रेस सेवादल जिलाध्यक्ष दिलीप बंजारा,पूर्व विधायक चुरावन मंगेशकर और कांग्रेस कमेटी प्रदेश सचीव रूपलाल कोसरे  मंदिर में मत्था टेक लिया आशिर्वाद ।

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