जिला संवाददाता जांजगीर-चांपा - भरत सिंह जांगड़े की रिपोर्ट ---
ग्राम पंचायत चोरहादेवरी में नाली निर्माण के नाम पर ₹1 लाख 95 हजार की राशि आहरित, जांच में मौके पर नहीं मिली नाली; वित्तीय अनियमितता का गंभीर मामला उजागर
बम्हनीडीह, जांजगीर-चांपा। जनपद पंचायत बम्हनीडीह अंतर्गत ग्राम पंचायत चोरहादेवरी में 15वें वित्त आयोग की राशि से स्वीकृत नाली निर्माण कार्य में गंभीर वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया है। आरोप है कि नाली निर्माण कार्य के लिए ₹1 लाख 95 हजार की शासकीय राशि आहरित कर ली गई, जबकि जांच के दौरान संबंधित स्थल पर नाली का निर्माण नहीं पाया गया। जांच दल द्वारा प्रस्तुत प्रतिवेदन में भी स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि निर्धारित स्थान पर नाली का कोई अस्तित्व नहीं मिला, जिससे पूरे मामले ने पंचायत प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायत चोरहादेवरी में वर्ष 2025 के दौरान 15वें वित्त आयोग की राशि से नाली निर्माण कार्य स्वीकृत किया गया था। आरोप है कि निर्माण कार्य पूर्ण किए बिना ही राशि का आहरण कर लिया गया। मामले की शिकायत के बाद गठित जांच दल ने स्थल का निरीक्षण किया और भौतिक सत्यापन के दौरान पाया कि जिस स्थान पर नाली निर्माण दर्शाया गया है, वहां कोई निर्माण कार्य नहीं हुआ है। जांच प्रतिवेदन में इस तथ्य का स्पष्ट उल्लेख किए जाने के बाद पूरे मामले की गंभीरता और बढ़ गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि विकास कार्यों के लिए शासन द्वारा भेजी जाने वाली राशि का उद्देश्य गांव में मूलभूत सुविधाओं का विस्तार करना है, लेकिन यदि निर्माण कार्य किए बिना ही भुगतान कर दिया जाए तो यह न केवल शासकीय धन का दुरुपयोग है, बल्कि ग्रामीणों के अधिकारों और विकास योजनाओं के साथ भी अन्याय है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि ऐसे मामलों के कारण गांव का विकास प्रभावित हो रहा है और जनता को योजनाओं का वास्तविक लाभ नहीं मिल पा रहा है।
स्थानीय नागरिकों ने इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय, निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच कराने, दोषी अधिकारियों, कर्मचारियों एवं संबंधित जिम्मेदार व्यक्तियों की जवाबदेही तय करने तथा शासकीय राशि की वसूली के साथ उनके विरुद्ध कठोर प्रशासनिक एवं कानूनी कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो भविष्य में भी इस प्रकार की अनियमितताओं को बढ़ावा मिलेगा।
यह मामला पंचायत स्तर पर विकास कार्यों की गुणवत्ता, वित्तीय पारदर्शिता और प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करता है। अब सभी की निगाहें प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं। ग्रामीणों को उम्मीद है कि जांच प्रतिवेदन के आधार पर दोषियों के विरुद्ध सख्त कदम उठाए जाएंगे, शासकीय धन की भरपाई सुनिश्चित की जाएगी तथा भविष्य में इस प्रकार की अनियमितताओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रभावी व्यवस्था लागू की जाएगी।
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