भाजपा को बड़ा राजनीतिक झटका: पूर्व भाजयुमो प्रदेश अध्यक्ष एवं पूर्व राष्ट्रीय मंत्री रवि भगत ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से दिया इस्तीफा....


भाजपा को बड़ा राजनीतिक झटका: पूर्व भाजयुमो प्रदेश अध्यक्ष एवं पूर्व राष्ट्रीय मंत्री रवि भगत ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से दिया इस्तीफा

रायगढ़। छत्तीसगढ़ की राजनीति में बुधवार को उस समय हलचल तेज हो गई, जब भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ युवा नेता, भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) छत्तीसगढ़ के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं पूर्व राष्ट्रीय मंत्री रवि भगत ने भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने अपना त्यागपत्र भाजपा मंडल अध्यक्ष रेशम होता को सौंपते हुए व्यक्तिगत कारणों का हवाला दिया है। साथ ही त्यागपत्र की प्रतिलिपि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष, प्रदेश अध्यक्ष एवं जिला अध्यक्ष को भी प्रेषित की गई है।
रवि भगत लंबे समय तक भाजपा और भारतीय जनता युवा मोर्चा का सक्रिय एवं प्रभावशाली चेहरा रहे हैं। छात्र राजनीति से लेकर संगठन के विभिन्न महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन करते हुए उन्होंने प्रदेश स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाई। उन्हें युवा नेतृत्व के मजबूत स्तंभों में गिना जाता रहा है। प्रदेश अध्यक्ष और राष्ट्रीय मंत्री जैसे अहम दायित्व संभालने के बाद उनका पार्टी की प्राथमिक सदस्यता छोड़ना राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।

अपने त्यागपत्र में रवि भगत ने लिखा है कि एक छोटे से गांव के साधारण कार्यकर्ता को भारतीय जनता पार्टी ने सम्मान और पहचान दी, जिसके लिए वे पार्टी नेतृत्व और संगठन के प्रति सदैव आभारी रहेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि कुछ व्यक्तिगत कारणों से वे भाजपा की प्राथमिक सदस्यता छोड़ रहे हैं तथा उनके त्यागपत्र को स्वीकार किया जाए। उल्लेखनीय है कि पत्र में उन्होंने किसी भी नेता, पदाधिकारी या संगठन के खिलाफ कोई आरोप नहीं लगाया है।

रवि भगत के इस फैसले ने भाजपा संगठन के साथ-साथ प्रदेश की राजनीतिक फिजा में भी चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लंबे समय तक संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाने वाले नेता का इस तरह पार्टी से अलग होना निश्चित रूप से संगठन के लिए एक बड़ा संदेश माना जाएगा। हालांकि इस्तीफे के पीछे उन्होंने केवल निजी कारण बताए हैं, लेकिन उनके इस कदम के दूरगामी राजनीतिक मायने भी निकाले जा रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार रवि भगत की संगठन में मजबूत पकड़ रही है और विशेषकर युवाओं के बीच उनका प्रभाव आज भी कायम माना जाता है। ऐसे में उनका इस्तीफा स्थानीय ही नहीं बल्कि प्रदेश स्तर की राजनीति में भी चर्चा का विषय बन गया है। अब राजनीतिक गलियारों में यह सवाल भी उठने लगा है कि क्या यह केवल सक्रिय राजनीति से कुछ समय की दूरी है या आने वाले दिनों में कोई नई राजनीतिक दिशा देखने को मिलेगी।
फिलहाल भाजपा की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि त्यागपत्र प्राप्त होने के बाद नियमानुसार आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
रायगढ़ से लेकर रायपुर तक इस घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चाओं का दौर जारी है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि रवि भगत का अगला राजनीतिक कदम क्या होगा और भाजपा संगठन इस इस्तीफे पर क्या रुख अपनाता है।

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