चीनी आयात के मुद्दे पर साकेत जांगड़े का सरकार पर निशाना.....

चीनी आयात के मुद्दे पर साकेत जांगड़े का सरकार पर निशाना

“पेट्रोल के लिए गन्ने से इथेनॉल, फिर चीनी के लिए विदेशों पर निर्भरता क्यों?”

जैजैपुर। देश में पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता कम करने के लिए इथेनॉल मिश्रण को बढ़ावा देने की नीति के बीच चीनी आयात की स्थिति को लेकर छत्तीसगढ़ युवा कांग्रेस के सदस्य एवं युवा कांग्रेस विधानसभा जैजैपुर के अध्यक्ष प्रत्याशी श्री साकेत जांगड़े ने केंद्र सरकार की नीति-निर्माण प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

श्री जांगड़े ने कहा कि सरकार को ऐसी नीतियां बनानी चाहिए, जिनमें किसानों के हित, देश की ऊर्जा जरूरत, खाद्य सुरक्षा और आम उपभोक्ताओं की जेब—इन सभी के बीच संतुलन बना रहे। उन्होंने कहा कि यदि देश में चीनी की घरेलू जरूरत पूरी करने के लिए आयात की आवश्यकता पड़ रही है, तो सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि उत्पादन, खपत और भविष्य की मांग का आकलन करते समय किन पहलुओं को ध्यान में रखा गया था।

उन्होंने कहा, “पेट्रोल में इथेनॉल का मिश्रण बढ़ाना यदि देश के पेट्रोलियम आयात को कम करने की दिशा में उठाया गया कदम है, तो उसका स्वागत किया जा सकता है। लेकिन ऊर्जा सुरक्षा के साथ खाद्य सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि किसी एक लक्ष्य को हासिल करने की कोशिश में किसानों और उपभोक्ताओं के हित प्रभावित न हों।”

श्री जांगड़े ने आगे कहा कि नीति की सफलता केवल आंकड़ों और घोषणाओं से नहीं, बल्कि उसके वास्तविक परिणामों से तय होती है। यदि एक ओर आत्मनिर्भरता की बात की जा रही है और दूसरी ओर आवश्यक खाद्य वस्तुओं के आयात की स्थिति बन रही है, तो सरकार को इसके कारणों और अपनी नीति की दीर्घकालिक रणनीति पर जनता के सामने स्पष्ट जवाब देना चाहिए।

उन्होंने सरकार से मांग की कि इथेनॉल नीति, गन्ने के उपयोग, चीनी उत्पादन, घरेलू खपत तथा आयात-निर्यात से जुड़े आंकड़े सार्वजनिक किए जाएं, ताकि देश की जनता को वास्तविक स्थिति की जानकारी मिल सके।

“जनता को नारे नहीं, नीति का परिणाम चाहिए”

साकेत जांगड़े ने कहा कि केंद्र सरकार को किसान की आय, उपभोक्ता की क्रय शक्ति और देश की खाद्य एवं ऊर्जा सुरक्षा—तीनों को प्राथमिकता देते हुए दीर्घकालीन नीति तैयार करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार को राजनीतिक प्रचार से आगे बढ़कर अपनी नीतियों की जवाबदेही स्वीकार करनी चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि किसी भी निर्णय का अनावश्यक आर्थिक बोझ आम जनता पर न पड़े।

श्री जांगड़े ने कहा कि आज देश की जनता सरकार से सीधा सवाल पूछ रही है—आखिर ऐसी नीति क्यों, जिसमें एक तरफ पेट्रोलियम आयात घटाने की कोशिश हो और दूसरी तरफ चीनी जैसी आवश्यक वस्तु के आयात की आवश्यकता पैदा हो?

उन्होंने कहा कि जनता को जवाब चाहिए, आंकड़ों की बाजीगरी नहीं; ठोस नीति चाहिए, केवल घोषणाएं नहीं।


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