मनरेगा में केंद्र की हिस्सेदारी घटाना ग्रामीण भारत और राज्यों के हितों पर सीधा प्रहार – डॉ. शिव कुमार डहरिया
रायपुर। पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. शिव कुमार डहरिया ने केंद्र सरकार पर मनरेगा के वित्तीय ढांचे में बदलाव को लेकर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि यह निर्णय राज्यों के अधिकारों, ग्रामीण विकास और गरीब मजदूरों के हितों पर सीधा प्रहार है।
डॉ. डहरिया ने कहा कि मनरेगा देश के करोड़ों ग्रामीण परिवारों के लिए आजीविका का सबसे बड़ा सहारा है। इस योजना के माध्यम से गांवों में रोजगार सृजन के साथ-साथ सड़क, तालाब, नहर, जल संरक्षण और अन्य विकास कार्यों को गति मिली है। पहले इस योजना में केंद्र और राज्य के बीच 80:20 के अनुपात में वित्तीय भागीदारी होती थी, जिससे राज्यों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं पड़ता था और योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन संभव हो पाता था।
उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा इस अनुपात को 60:40 किए जाने से राज्यों पर भारी वित्तीय दबाव बढ़ेगा। इससे विकास कार्यों की गति प्रभावित होगी और कई योजनाओं के संचालन में कठिनाइयाँ उत्पन्न हो सकती हैं। राज्यों को अब अपने सीमित संसाधनों से अधिक राशि वहन करनी पड़ेगी, जिसका सीधा असर ग्रामीण रोजगार और जनकल्याणकारी योजनाओं पर दिखाई देगा।
डॉ. शिव कुमार डहरिया ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार एक ओर राज्यों की आर्थिक जिम्मेदारी लगातार बढ़ा रही है, वहीं दूसरी ओर उन्हीं योजनाओं की सफलता का राजनीतिक श्रेय लेने में कोई कमी नहीं छोड़ती। उन्होंने कहा कि यदि केंद्र सरकार वास्तव में किसानों, मजदूरों और ग्रामीण भारत के विकास के प्रति प्रतिबद्ध है, तो उसे मनरेगा में अपनी वित्तीय हिस्सेदारी बढ़ाकर राज्यों को पर्याप्त सहयोग देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि वर्तमान भाजपा सरकार पहले से ही वित्तीय संसाधनों और बजट संबंधी चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे में केंद्र द्वारा अतिरिक्त बोझ डालना जनहित के विरुद्ध है। यदि यही स्थिति बनी रही तो ग्रामीण विकास कार्यों, रोजगार सृजन और आधारभूत सुविधाओं के विस्तार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
डॉ. डहरिया ने केंद्र सरकार से मांग की कि मनरेगा के वित्तीय ढांचे की पुनर्समीक्षा कर राज्यों के हितों की रक्षा की जाए तथा गरीब मजदूरों और ग्रामीण विकास से जुड़ी योजनाओं के लिए पर्याप्त आर्थिक सहायता सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी हमेशा ग्रामीण भारत, किसानों और श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष करती रही है और आगे भी उनके हितों की आवाज़ बुलंद करती रहेगी।
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