"किसानों को धान बेचने से रोकने की साजिश, मठ-मंदिरों की जमीनों पर सरकार की नजर और चंदा चोरी में बड़े चेहरों को बचाने का खेल" – डॉ. शिवकुमार डहरिया
रायपुर।
छत्तीसगढ़ शासन के पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. शिवकुमार डहरिया ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि प्रदेश में किसान, युवा, धार्मिक संस्थाएं और आम जनता लगातार सरकार की नीतियों का खामियाजा भुगत रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जनता के हितों की रक्षा करने के बजाय उन्हें परेशान करने और असली मुद्दों से ध्यान भटकाने में लगी हुई है।
डॉ. डहरिया ने कहा कि एग्रीस्टैक और पंजीयन के नाम पर किसानों को कागजी प्रक्रियाओं के ऐसे मकड़जाल में फंसाया जा रहा है कि वे समय पर अपना धान तक नहीं बेच पा रहे हैं। अन्नदाता सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर है, जबकि भाजपा सरकार किसान हितैषी होने का दावा करती है। उन्होंने कहा कि यदि यही स्थिति रही तो हजारों किसानों की मेहनत और उनकी आर्थिक स्थिति पर गंभीर असर पड़ेगा।
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश के मठ-मंदिरों की जमीनों को लेकर भी सरकार की नीयत पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। धार्मिक आस्था से जुड़ी संपत्तियों की सुरक्षा करने के बजाय सरकार की नीतियां संदेह पैदा कर रही हैं। सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि आखिर इन संपत्तियों को लेकर उसकी मंशा क्या है।
डॉ. डहरिया ने चंदा चोरी प्रकरण पर भी सरकार को घेरते हुए कहा कि इस मामले में केवल चपरासी और ड्राइवर जैसे छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई कर खानापूर्ति की जा रही है, जबकि असली जिम्मेदार और बड़े चेहरों को बचाने की कोशिश हो रही है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार में जरा भी नैतिकता बची है तो पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर पर्दे के पीछे बैठे हर जिम्मेदार व्यक्ति पर कार्रवाई की जाए।
उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार की कथनी और करनी में बड़ा अंतर है। एक ओर भ्रष्टाचार के खिलाफ "जीरो टॉलरेंस" की बातें की जाती हैं, वहीं दूसरी ओर बड़े लोगों पर हाथ डालने से परहेज किया जाता है। इससे जनता का विश्वास लगातार कमजोर हो रहा है।
डॉ. डहरिया ने चेतावनी दी कि किसानों के अधिकारों पर कुठाराघात, धार्मिक संपत्तियों को लेकर उठ रहे सवाल और भ्रष्टाचार के मामलों में कथित दोहरे मापदंड अब जनता के बीच बड़ा मुद्दा बन चुके हैं। उन्होंने सरकार से मांग की कि किसानों को बिना अनावश्यक बाधाओं के धान बेचने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, धार्मिक संस्थाओं की संपत्तियों की सुरक्षा पर स्पष्ट नीति सामने लाई जाए और भ्रष्टाचार के हर मामले में छोटे-बड़े सभी दोषियों के खिलाफ समान रूप से निष्पक्ष कार्रवाई की जाए।
"जनता सब देख रही है, अब जवाब देना पड़ेगा। सत्ता का अहंकार हमेशा नहीं चलता, लोकतंत्र में अंतिम फैसला जनता ही करती है।" – डॉ. शिवकुमार डहरिया
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